*एक बार एक ब्राह्मण मरणाशन पड़ा था।*
✍कबीरदास उससे मिलने के लिए उसके घर आये।
ब्राह्मण ने उनसे मरते वक्त गंगाजल पीने की इच्छा जताई। कबीरदास गंगाजल लेकर आये।
ब्राह्मण ने यह कहते हुए पानी पीने से इनकार कर दिया कि 'तुमने गंगाजल को मेरे बर्तन के बजाय अपने बर्तन मेँ लाकर गंगाजल को ही अशुद्द कर दिया।'
*इसपर कबीरदास ने कहा-
'आपको कभी मुक्ति नहीँ मिलेगी। जो गंगाजल बर्तन को पवित्र नहीँ कर सकती है वो आपको क्या मुक्ति दिलायेगी ।'*
*पाखण्ड पर करारी चोट*👊👊
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