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Saturday, July 15, 2017

Nice Hindi story...please read and share

बहुत ही अच्छी स्टोरी है कृपया जरूर पढ़ें

.

एक जौहरी के निधन के बाद उसका

परिवार संकट में पड़ गया।😂😂

,

खाने के भी लाले पड़ गए।😇

,

एक दिन उसकी पत्नी ने अपने 💃बेटे

को नीलम का एक हार

देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की

दुकान पर ले जाओ।😂

,

कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।😛

,

💃बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।

,

👳चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख

परखकर कहा- बेटा,

मां से कहना कि अभी बाजार

बहुत मंदा है।😍

,

थोड़ा रुककर बेचना,

अच्छे दाम मिलेंगे।😍

,

उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि

तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।😁😁

,

अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान

पर जाने लगा और वहां हीरों

रत्नो की परख का काम सीखने लगा।😍😍

,

एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।

लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने

आने लगे।😍😍

,

एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी

मां से वह हार लेकर आना और कहना

कि अब बाजार बहुत तेज है,😍😍

,

उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।😁

,

मां से हार लेकर उसने परखा तो

पाया कि वह तो नकली है।😇😂

,

वह उसे घर पर ही छोड़ कर

दुकान लौट आया।😂😂

,

👳चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?

,

उसने कहा, वह तो नकली था।😊😍

,

तब 👳चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार

हार लेकर आये थे, तब मैं उसे

नकली बता देता तो तुम सोचते कि

आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा

हमारी चीज को भी नकली

बताने लगे।😍

,

आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो

पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।😍

,

सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में

हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं,

सब गलत है।😛😂

,

और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार

होकर रिश्ते बिगडते है।

Think and Live Long Relationship

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़

किसी अपने का दामन.😇

,

ज़िंदगी बीत जाती है

अपनो को अपना बनाने में.😇

👉अगर ये कहानी आपका दिल छु गई तो बिना पोस्ट शेयर किये बिना मत रहिएगा।।

😍

Wednesday, February 15, 2017

Knowledge is Power

विभूषयन्ति पुरुषं
हारा न चन्द्रोज्ज्वलाः
न स्नानं न विलोपनं
न कुसुमं नालङ्कृता मूर्धजाः।
वाण्येका समलङ्करोति पुरुषं
या संस्कृता र्धायते
क्षीयन्ते खलु भूषणानि
सततं वाग्भूषणं भूषणम्॥

बाजुबंद पुरुष को शोभित नहीं करते और न ही चन्द्रमा के समान उज्ज्वल हार, न स्नान, न चन्दन, न फूल और न सजे हुए केश ही शोभा बढ़ाते हैं। केवल सुसंस्कृत प्रकार से धारण की हुई एक वाणी ही उसकी सुन्दर प्रकार से शोभा बढ़ाती है। साधारण आभूषण नष्ट हो जाते हैं, वाणी ही सनातन आभूषण है॥

Bracelets do not adorn a man, nor do necklaces which shine like the moon. Neither a bath, nor an ointment, nor flowers and nor decorated hair adorn him. It is cultured speech alone which properly embellishes a man. All other ornaments lose their glitter, only the jewel of speech ever remains.

काव्यशास्त्रविनोदेन
कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसनेन तु मूर्खाणां
निद्रया कलहेन वा॥

बुद्धिमानों का समय काव्य और शास्त्र से आनंद प्राप्त करने में व्यतीत होता है, जबकि मूर्खों का समय व्यसन, नींद और कलह में व्यतीत होता है॥

The wise utilize their time enjoying poetry and scriptures whereas fools waste it in bad habits, sleep and quarrel.

दानेन तुल्यं सुहृदास्ति नान्यो
लोभाच्च नान्योऽस्ति रिपुः पृथिव्याम्।
विभूषणं शीलसमं न चान्यत्
सन्तोषतुल्यं धनमस्ति नान्यत्॥

दान के समान अन्य कोई सुहृद नहीं है और पृथ्वी पर लोभ के समान कोई शत्रु नहीं है। शील के समान कोई आभूषण नहीं है और संतोष के समान कोई धन नहीं है॥

There is no well-wisher like charity and there is no bigger enemy than greediness in this world. There is no other ornament like character and there is no other money like satisfaction.


न धैर्येण विना लक्ष्मी-
र्न शौर्येण विना जयः।
न ज्ञानेन विना मोक्षो
न दानेन विना यशः॥

धैर्य के बिना धन, वीरता के बिना विजय, ज्ञान के बिना मोक्ष और दान के बिना यश प्राप्त नहीं होता है॥

Money without patience, victory without courage, liberation without knowledge and fame without charity cannot be achieved. 


नरस्याभरणं रूपं
रूपस्याभरणं गुणः।
गुणस्याभरणं ज्ञानं
ज्ञानस्याभरणं क्षमा॥

मनुष्य का आभूषण रूप, रूप का आभूषण गुण, गुणों का आभूषण ज्ञान और ज्ञान का आभूषण क्षमा है॥

Ornament of a man is beauty, ornament of beauty is virtue, ornament of virtues is knowledge and the ornament of knowledge is forgiveness.


न हि ज्ञानसमं लोके
पवित्रं चान्यसाधनं।
विज्ञानं सर्वलोकानामु-
त्कर्षाय स्मृतं खलु॥

इस लोक में ज्ञान के समान पवित्र दूसरा कोई साधन नहीं है, शास्त्रों में विज्ञान को समस्त लोकों की प्रगति के लिए निश्चित किया गया है॥

There is nothing more sacred than knowledge in this world. In scriptures, science is considered fundamental to progress of this world.


नमन्ति फलिता वृक्षा
नमन्ति च बुधा जनाः।
शुष्ककाष्ठानि मूर्खाश्च
भिद्यन्ते न नमन्ति च॥

फले हुए वृक्ष झुक जाते हैं और बुद्धिमान लोग विनम्र हो जाते हैं पर सूखी लकड़ी और मूर्ख काटने पर भी नहीं झुकते॥

Tuesday, December 13, 2016

Why Father is great? Gujarati poem on Father.

એક વખત જરુર વાંચજો

આંસુ ના આવી જાય તો કહેજો

👌👌👌ખૂબ સુંદર 👌👌👌

🍃🍃🍃🍃

પપ્પા  એટલે  શું?

આપણા ઘરની વન મેન સરકાર એટલે પપ્પા;

આત્મવિશ્વાસનો અડીખમ ગિરનાર એટલે પપ્પા;

હિંમતનો દરિયો અને ક્રોધનું ઝાડ એટલે પપ્પા;

સંતાનોના રક્ષણની સલામત વાડ એટલે પપ્પા;

મમ્મીએ મને ડરતા શીખવ્યું; પપ્પાએ મને લડતા શીખવ્યું.

મમ્મીએ મારી ઠેંસ પર મલમપટ્ટી કરી છે; પપ્પાએ ઈ ઠેંસ જોઈને મારી ધૂળ કાઢી છે.

મમ્મીએ મને સંવેદનશીલ બનાવ્યો; જ્યારે પપ્પાએ મને સૈનિક બનાવ્યો છે.

પપ્પા એક પ્રકૃતિ છે જેમાં સતત બદલાવ આવ્યે રાખે છે.
મમ્મીને સમજી શકાય પણ પપ્પાને સમજવા સંતાનોની ફુટપટ્ટી હંમેશા ટુંકી પડે છે.

આ પપ્પા જે સવારે થપ્પડ મારે અને સાંજે બગીચે ફરવા લઈ જાય છે.

આ પપ્પા જે પહેલા ખૂબ રોવડાવે અને પછી દિવાળીના ફટાકડા લઈ આવે.

આ પપ્પા જે પોતે સાઈકલ સ્વીકારીને છોકરાવને બાઈક અપાવે.

આ પપ્પા જે સંતાનોની બધી ઈચ્છા પુરી કરવા પોતાની તમામ ઈચ્છા દફનાવે.

આ પપ્પા જે સીઝનનું પહેલું ફ્રુટ ઘરમાં લાવે અને કોઈના થેંક્યુંની પણ અપેક્ષા ન રાખે.

આ પપ્પા જે કદી કોઈનું ધાર્યું કરે નહીં અને પોતાનું ધાર્યું બઘું કરાવે.

આ પપ્પાને સમજવા આપણે કદાચ ફરી જન્મ લેવો પડશે.

આ પપ્પા રીટાયર્ડ થઈ શકે, ટાયર્ડ નહીં...!

તમે સ્વીકારો કે ન સ્વીકારો હું તો સ્વીકારૂ છું કે આપણા પપ્પા પાસે આપણે કંઈ જ નથી.

પપ્પાની સાયકલની સીટ પર બેસીને જે દુનિયા મે જોઈ છે એ દુનિયા તો મને આજે મારી ફોર વ્હીલર કારમાંથી પણ નથી દેખાતી.   ક્યાંક એ દુનિયા પપ્પા સાથે રીટાયર્ડ તો નથી થઈ ગઈ ને ?

પપ્પાએ માંડ માંડ લોન લઈને લીધેલું એ પેલુ મકાન જેના વ્હાઈટ વોશ કરવા માટે પપ્પા પાસે પૈસા નહોતા.
છતા\'ય ઈંટે ઈંટે પપ્પાના પરસેવાનો કલર અમે અનુભવેલો.

પપ્પાને મારી કિંમત છે, ને પપ્પા મારી હિંમત છે.
એક શ્રીફળ સમુ વ્યક્તિત્વ એટલે મારા પપ્પા-
બહારથી કડક અને અંદરથી ભીના ભીના..!

પપ્પાનો સ્વભાવ કદી સુધારી ન શકાય કારણ કે ઈ પપ્પા છે;

પપ્પાને એની તમામ મર્યાદા સાથે સ્વીકારાય કારણ કે ઈ પપ્પા છે;

યાદ રાખજો... પપ્પા નોકરીમાંથી રીટાયર્ડ થાય છે , મગજથી નહીં....

મારો અહમ, મારી બુદ્ધી, મારૂ સ્વમાન, મારૂ જ્ઞાન , મારી આવડત અને મારૂ આવું ઘણુ બધું જ....
મારા પપ્પાના પરસેવાના ચાર ટીપા સામે ક્ષુલ્લક છે.

પપ્પા હંમેશા મહાન જ હોય છે.  તોય એના મહાન સંતાનો એની ક્રેડીટ મમ્મીને આપે છે.
છતા પપ્પા મૌન સેવે છે. બસ એટલે જ પપ્પા મહાન છે.

પપ્પાની મહાનતા કોઈ કવિઓ, લેખકો કે વિવેચકોની મોહતાજ નથી

બસ એટલે પપ્પા મહાન છે....

👌👌👌👌👌

🙏🙏🙏🙏🙏

Love you Papa.....

Monday, December 12, 2016

How Sanskrit language help in better health? Must read blog.

संस्कृत भाषा से अपनी बीमारी को ठीक करें

👌संस्कॄत का जादू👌

संस्कृत में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं जो उसे अन्य सभी भाषाओं से उत्कृष्ट और विशिष्ट बनाती हैं।

( ०१ ) अनुस्वार (अं ) और विसर्ग(अ:) :-

संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण और लाभदायक व्यवस्था है, अनुस्वार और विसर्ग।

पुल्लिंग के अधिकांश शब्द विसर्गान्त होते हैं —

यथा- राम: बालक: हरि: भानु: आदि। और

नपुंसक लिंग के अधिकांश शब्द अनुस्वारान्त होते हैं—
यथा- जलं वनं फलं पुष्पं आदि।

अब जरा ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि विसर्ग का उच्चारण और कपालभाति प्राणायाम दोनों में श्वास को बाहर फेंका जाता है। अर्थात् जितनी बार विसर्ग का उच्चारण करेंगे उतनी बार कपालभाति प्रणायाम अनायास ही हो जाता है। जो लाभ कपालभाति प्रणायाम से होते हैं, वे केवल संस्कृत के विसर्ग उच्चारण से प्राप्त हो जाते हैं।

उसी प्रकार अनुस्वार का उच्चारण और भ्रामरी प्राणायाम एक ही क्रिया है । भ्रामरी प्राणायाम में श्वास को नासिका के द्वारा छोड़ते हुए भौंरे की तरह गुंजन करना होता है, और अनुस्वार के उच्चारण में भी यही क्रिया होती है। अत: जितनी बार अनुस्वार का उच्चारण होगा , उतनी बार भ्रामरी प्राणायाम स्वत: हो जावेगा।

कपालभाति और भ्रामरी प्राणायामों से क्या लाभ है? यह बताने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि स्वामी रामदेव जी जैसे संतों ने सिद्ध करके सभी को बता दिया है। मैं तो केवल यह बताना चाहता हूँ कि संस्कृत बोलने मात्र से उक्त प्राणायाम अपने आप होते रहते हैं।
जैसे हिन्दी का एक वाक्य लें- '' राम फल खाता है``

इसको संस्कृत में बोला जायेगा- '' राम: फलं खादति"
राम फल खाता है ,यह कहने से काम तो चल जायेगा ,किन्तु राम: फलं खादति कहने से अनुस्वार और विसर्ग रूपी दो प्राणायाम हो रहे हैं। यही संस्कृत भाषा का रहस्य है।

संस्कृत भाषा में एक भी वाक्य ऐसा नहीं होता जिसमें अनुस्वार और विसर्ग न हों। अत: कहा जा सकता है कि संस्कृत बोलना अर्थात् चलते फिरते योग साधना करना।

२- शब्द-रूप :-
संस्कृत की दूसरी विशेषता है शब्द रूप। विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक ही रूप होता है,जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 25 रूप होते हैं। जैसे राम शब्द के निम्नानुसार २५ रूप बनते हैं।
यथा:- रम् (मूल धातु)
राम: रामौ रामा:
रामं रामौ रामान्
रामेण रामाभ्यां रामै:
रामाय रामाभ्यां रामेभ्य:
रामत् रामाभ्यां रामेभ्य:
रामस्य रामयो: रामाणां
रामे रामयो: रामेषु
हे राम! हेरामौ! हे रामा:!

ये २५ रूप सांख्य दर्शन के २५ तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिस प्रकार पच्चीस तत्वों के ज्ञान से समस्त सृष्टि का ज्ञान प्राप्त हो जाता है, वैसे ही संस्कृत के पच्चीस रूपों का प्रयोग करने से आत्म साक्षात्कार हो जाता है। और इन २५ तत्वों की शक्तियाँ संस्कृतज्ञ को प्राप्त होने लगती है।
सांख्य दर्शन के २५ तत्व निम्नानुसार हैं।-

आत्मा (पुरुष)
(अंत:करण ४ ) मन बुद्धि चित्त अहंकार
(ज्ञानेन्द्रियाँ ५ ) नासिका जिह्वा नेत्र त्वचा कर्ण
(कर्मेन्द्रियाँ ५) पाद हस्त उपस्थ पायु वाक्
(तन्मात्रायें ५ ) गन्ध रस रूप स्पर्श शब्द
( महाभूत ५ ) पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश

३- द्विवचन :-
संस्कृत भाषा की तीसरी विशेषता है द्विवचन। सभी भाषाओं में एक वचन और बहु वचन होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है। इस द्विवचन पर ध्यान दें तो पायेंगे कि यह द्विवचन बहुत ही उपयोगी और लाभप्रद है।
जैसे :- राम शब्द के द्विवचन में निम्न रूप बनते हैं:- रामौ , रामाभ्यां और रामयो:। इन तीनों शब्दों के उच्चारण करने से योग के क्रमश: मूलबन्ध ,उड्डियान बन्ध और जालन्धर बन्ध लगते हैं, जो योग की बहुत ही महत्वपूर्ण क्रियायें हैं।

४ सन्धि :-
संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है सन्धि। ये संस्कृत में जब दो शब्द पास में आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है। उस बदले हुए उच्चारण में जिह्वा आदि को कुछ विशेष प्रयत्न करना पड़ता है।ऐंसे सभी प्रयत्न एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति के प्रयोग हैं।
''इति अहं जानामि" इस वाक्य को चार प्रकार से बोला जा सकता है, और हर प्रकार के उच्चारण में वाक् इन्द्रिय को विशेष प्रयत्न करना होता है।

यथा:- १ इत्यहं जानामि।
२ अहमिति जानामि।
३ जानाम्यहमिति ।
४ जानामीत्यहम्।

इन सभी उच्चारणों में विशेष आभ्यंतर प्रयत्न होने से एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का सीधा प्रयोग अनायास ही हो जाता है। जिसके फल स्वरूप मन बुद्धि सहित समस्त शरीर पूर्ण स्वस्थ एवं नीरोग हो जाता है।
इन समस्त तथ्यों से सिद्ध होता है कि संस्कृत भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान की भाषा ही नहीं ,अपितु मनुष्य के सम्पूर्ण विकास की कुंजी है। यह वह भाषा है, जिसके उच्चारण करने मात्र से व्यक्ति का कल्याण हो सकता है। इसीलिए इसे देवभाषा और अमृतवाणी कहते हैं।संकलित

Above article was received from one student, who is pursuing her Ph.D in Sanskrit besides being a classical vocalist of Mewati Gharana.

My own feeling is that this could open a mysterious link between Yogasans, Pranayam and Vedic Chants (Naadyog).

Your comments are welcome.

Tuesday, December 6, 2016

Nice story - How knowledge helps?

बहुत ही अच्छी स्टोरी है कृपया जरूर पढ़ें 👏
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एक जौहरी के निधन के बाद उसका
परिवार संकट में पड़ गया।
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खाने के भी लाले पड़ गए।
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एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे
को नीलम का एक हार
देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की
दुकान पर ले जाओ।
,
कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।
,
बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।
,
चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख
परखकर कहा- बेटा,
मां से कहना कि अभी बाजार
बहुत मंदा है।
,
थोड़ा रुककर बेचना,
अच्छे दाम मिलेंगे।
,
उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि
तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।
,
अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान
पर जाने लगा और वहां हीरों
रत्नो की परख का काम सीखने लगा।
,
एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।
लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने
आने लगे।
,
एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी
मां से वह हार लेकर आना और कहना
कि अब बाजार बहुत तेज है,
,
उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।
,
मां से हार लेकर उसने परखा तो
पाया कि वह तो नकली है।
,
वह उसे घर पर ही छोड़ कर
दुकान लौट आया।
,
चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?
,
उसने कहा, वह तो नकली था।
,
तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार
हार लेकर आये थे, तब मैं उसे
नकली बता देता तो तुम सोचते कि
आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा
हमारी चीज को भी नकली
बताने लगे।
,
आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो
पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।
,
सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में
हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं,
सब गलत है।
,
और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार
होकर रिश्ते बिगडते है।
Think and Live Long Relationship
ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़
किसी अपने का दामन.
,
ज़िंदगी बीत जाती है
अपनो को अपना बनाने में..!

अगर ये स्टोरी
दिल को छुआ हो तो शेयर जरूर करें 👍

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