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Friday, July 14, 2017

Gujarati stories...

*Please Read*
બે ભાઇઓ ઓફિસથી થાક્યા પાક્યા ઘેર આવ્યા.
ઘરે આવ્યા ત્યારે તેને ખબર પડી કે આજે લીફટ બંધ છે અને એ કોઇપણ સંજોગોમાં ચાલુ થઇ શકે તેમ નથી.
એમનો ફ્લેટ 80માં માળ પર આવેલો હતો પણ હવે પગથિયા ચઢવા સિવાય બીજો કોઇ વિકલ્પ
નહોતો.
એટલે વાતો કરતા કરતા 20 માળ ચઢી ગયા...

20માં માળે પહોંચ્યા પછી વિચાર્યુ કે આપણા ખભા પર આ થેલાઓ લઇને ચઢીએ છીએ પણ આ થેલાઓ તો કાલે પાછા લઇ જ જવાના છે તો એ અહિંયા જ છોડી દઇએ.

20માં માળ પર થેલા છોડીને એ આગળ વધ્યા ભાર હળવો થવાથી હવે એ સરળતાથી આગળ વધી રહ્યા હતા.

40માં માળ પર પહોંચ્યા પછી થોડો થાક લાગ્યો અને કંટાળ્યા પણ હતા એટલે વાતો કરતા કરતા બંને ઝગડવા લાગ્યા.
એક બીજાપર દોષોના ટોપલા ઢોળતા જાય અને દાદરા ચઢતા જાય.

60માં માળ પર પહોંચ્યા પછી સમજાયુ કે હવે ક્યાં વધુ ચઢવાનું બાકી છે તો પછી શા માટે ખોટા ઝગડીએ છીએ હવે તો બસ ખાલી 20 દાદરા જ ચઢવાના બાકી છે. બંને ઝગડવાનું બંધ કરીને આગળ વધ્યા
અને
80માં માળ પર આવી પહોંચ્યા અને હાશકારો થયો.
મોટાભાઇએ
નાનાને કહ્યુ, “ઘર પર તો કોઇ છે જ નહી ચાલ ઘરની ચાવી લાવ.”
નાનાએ કપાળ પર હાથ દઇને કહ્યુ , “ અરે , ચાવી તો 20માં માળ પર રાખેલા થેલામાં જ રહી ગઇ.”...

*જીવનમાં પણ કંઇક આવું જ બને છે*

*પ્રથમ 20*
વર્ષ સુધી આપણે માતા-પિતાની અપેક્ષાઓનો બોજો લઇને જ ચાલીએ છીએ.

*20 વર્ષ બાદ*
અપેક્ષાનો બોજો હળવો થતા જ મુકત બનીને જીવીએ કોઇ રોકનાર નહી કોઇ ટોકનાર નહી.

*40 વર્ષ પછી*
સમજાય કે મારે જે કંઇ કરવુ હતુ એ તો થયુ જ નથી એટલે અસંતોષની આગ જીવનને દઝાડે , ઝગડાઓ શરુ થાય.

આમ કરતાં કરતાં
*60 વર્ષ પુરા*
થાય પછી વિચારીએ કે હવે ક્યાં ઝાઝુ ખેંચવાનું છે ખોટી માથાકુટ શું કરવી.

જ્યારે
*80 વર્ષે*
પહોંચીએ ત્યારે સમજાય કે મારા 20માં વર્ષે જોયેલા સપનાઓ તો સાર્થક થયા જ નહી.
બસ આમ જ જીવન પુરુ થઇ ગયુ.
માટે
*યુવાનીમાં જોયેલા સપનાઓને સાર્થક કરવાનો શ્રેષ્ઠ સમય યુવાની જ છે.*
*80 વર્ષે જે જોઇતું હોય એ મેળવવાની શરુઆત 20મા વર્ષથી જ કરી દેવી જોઈએ.*
So start your investment at your younger age..  🙏🏻🙏🏻

Saturday, June 24, 2017

Nice story of small child... Must read

*एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।*

*जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।*

*पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।*

*उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।*

*बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।*

*कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।*

*आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।*

*एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,*

*"तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"*

*बच्चे ने आम के पेड से कहा,*
*"अब मेरी खेलने की उम्र नही है*

*मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"*

*पेड ने कहा,*
*"तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,*
*इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"*

*उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।*
*उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।*

*आम का पेड उसकी राह देखता रहता।*

*एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,*
*"अब मुझे नौकरी मिल गई है,*
*मेरी शादी हो चुकी है,*
*मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"*
*आम के पेड ने कहा,*

*"तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।"*
*उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।*

*आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।*

*कोई उसे देखता भी नहीं था।*
*पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।*

*फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,*
*"शायद आपने मुझे नही पहचाना,*
*मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"*

*आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,*
*"पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"*

*वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,*
*"आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,*
*आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"*

*इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।*

*वो आम का पेड़ हमारे माता-पिता हैं।*
*जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।*
*जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।*
*पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,*
*कोई समस्या खडी हुई।*

*आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।*

*जाकर उनसे लिपटे,*
*उनके गले लग जाये*
*फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।*

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Saturday, December 17, 2016

100 good things and 1 bad thing....An inspiring story

An inspiring story :

One day, a school teacher wrote on the board the following:

9×1=7
9×2=18
9×3=27
9×4=36
9×5=45
9×6=54
9×7=63
9×8=72
9×9=81
9×10=90

When she was done, she looked back at the students and they were all laughing at her because of the first equation which was wrong. Then the teacher said the following:

I wrote that first one wrong on purpose, because I wanted you to learn something important.

This was for you to know how the world out there will treat you. You can see that I wrote the *RIGHT thing nine times*, but none of you congratulated me for it. But you all laughed and criticized me because of one wrong thing I did.

The lesson is:

The world will never appreciate the good you do a million times, but will criticize the one wrong thing you do.

So don't get discouraged.

ALWAYS RISE ABOVE ALL THE LAUGHTER AND CRITICISM.

Have a wonderful  life.

Tuesday, December 6, 2016

Nice story - How knowledge helps?

बहुत ही अच्छी स्टोरी है कृपया जरूर पढ़ें 👏
.
एक जौहरी के निधन के बाद उसका
परिवार संकट में पड़ गया।
,
खाने के भी लाले पड़ गए।
,
एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे
को नीलम का एक हार
देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की
दुकान पर ले जाओ।
,
कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।
,
बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।
,
चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख
परखकर कहा- बेटा,
मां से कहना कि अभी बाजार
बहुत मंदा है।
,
थोड़ा रुककर बेचना,
अच्छे दाम मिलेंगे।
,
उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि
तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।
,
अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान
पर जाने लगा और वहां हीरों
रत्नो की परख का काम सीखने लगा।
,
एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।
लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने
आने लगे।
,
एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी
मां से वह हार लेकर आना और कहना
कि अब बाजार बहुत तेज है,
,
उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।
,
मां से हार लेकर उसने परखा तो
पाया कि वह तो नकली है।
,
वह उसे घर पर ही छोड़ कर
दुकान लौट आया।
,
चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?
,
उसने कहा, वह तो नकली था।
,
तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार
हार लेकर आये थे, तब मैं उसे
नकली बता देता तो तुम सोचते कि
आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा
हमारी चीज को भी नकली
बताने लगे।
,
आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो
पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।
,
सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में
हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं,
सब गलत है।
,
और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार
होकर रिश्ते बिगडते है।
Think and Live Long Relationship
ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़
किसी अपने का दामन.
,
ज़िंदगी बीत जाती है
अपनो को अपना बनाने में..!

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Crying and Trying .... What is difference?

We observe many people around us, who are doing complaints about almost everything. About their life, wife, situation etc. Means they are c...