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Wednesday, January 18, 2017

How our body works? Biological science

*जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या....*

★ *प्रातः ३ से ५* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से फेफड़ों में होती है। थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । इस समय दीर्घ श्वसन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता खूब विकसित होती है। उन्हें शुद्ध वायु (आक्सीजन) और ऋण आयन विपुल मात्रा में मिलने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते है, और सोते रहने वालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।

★ *प्रातः ५ से ७* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से आंत में होती है। प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान का लेना चाहिए । सुबह ७ के बाद जो मल-त्याग करते है उनकी आँतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।

★ *प्रातः ७ से ९* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से आमाशय में होती है। यह समय भोजन के लिए उपर्युक्त है । इस समय पाचक रस अधिक बनते हैं। भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार) घूँट-घूँट पिये।

★ *प्रातः ११ से १* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से हृदय में होती है।

★ *दोपहर १२ बजे* के आस–पास मध्याह्न – संध्या (आराम) करने की हमारी संस्कृति में विधान है। इसी लिए भोजन वर्जित है । इस समय तरल पदार्थ ले सकते है। जैसे मट्ठा पी सकते है। दही खा सकते है ।

★ *दोपहर १ से ३* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से छोटी आंत में होती है। इसका कार्य आहार से मिले पोषक तत्त्वों का अवशोषण व व्यर्थ पदार्थों को बड़ी आँत की ओर धकेलना है। भोजन के बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।

★ *दोपहर ३ से ५* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से मूत्राशय में होती है । २-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृति होती है।

★ *शाम ५ से ७* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय हल्का भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से ४० मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन न करे। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते है । देर रात को किया गया भोजन सुस्ती लाता है यह अनुभवगम्य है।

★ *रात्री ७ से ९* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से मस्तिष्क में होती है । इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है । आधुनिक अन्वेषण से भी इसकी पुष्टी हुई है।

★ *रात्री ९ से ११* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय पीठ के बल या बायीं करवट लेकर विश्राम करने से मेरूरज्जु को प्राप्त शक्ति को ग्रहण करने में मदद मिलती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है । यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।

★ *रात्री ११ से १* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से पित्ताशय में होती है । इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा , नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएं बनती है ।

★ *रात्री १ से ३* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से लीवर में होती है । अन्न का सूक्ष्म पाचन करना यह यकृत का कार्य है। इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन-तंत्र को बिगाड़ देता है । इस समय यदि जागते रहे तो शरीर नींद के वशीभूत होने लगता है, दृष्टि मंद होती है और शरीर की प्रतिक्रियाएं मंद होती हैं। अतः इस समय सड़क दुर्घटनाएँ अधिक होती हैं।

*यह एक आदर्श दिन चर्या है !!! वर्तमान में भले सभी संभव ना हो ईस के ईर्दगीर्द रहने से भी हभ कई बिमारीओ से बच शकते है और अपना जिवन आनंद से जी सकते हैं !!!!*

Saturday, December 17, 2016

100 good things and 1 bad thing....An inspiring story

An inspiring story :

One day, a school teacher wrote on the board the following:

9×1=7
9×2=18
9×3=27
9×4=36
9×5=45
9×6=54
9×7=63
9×8=72
9×9=81
9×10=90

When she was done, she looked back at the students and they were all laughing at her because of the first equation which was wrong. Then the teacher said the following:

I wrote that first one wrong on purpose, because I wanted you to learn something important.

This was for you to know how the world out there will treat you. You can see that I wrote the *RIGHT thing nine times*, but none of you congratulated me for it. But you all laughed and criticized me because of one wrong thing I did.

The lesson is:

The world will never appreciate the good you do a million times, but will criticize the one wrong thing you do.

So don't get discouraged.

ALWAYS RISE ABOVE ALL THE LAUGHTER AND CRITICISM.

Have a wonderful  life.

Ashish Barot's Blog I am Happy & Healthy

Crying and Trying .... What is difference?

We observe many people around us, who are doing complaints about almost everything. About their life, wife, situation etc. Means they are c...